नगांव में भव्य रूप से मनाया गया ‘अरुणोदय दिवस’, 53 पत्रकार सम्मानित,अरुणोदय असमिया नवजागरण की अग्निशिखा था – डॉ. शरद बरकटकी
थर्ड आई न्यूज
नगांव से जयप्रकाश सिंह
नगांव जिला साहित्य सभा के तत्वावधान में तथा रामानुजन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के व्यवस्थापन में विद्यालय के नवनिर्मित सभागृह में आज गरिमामय वातावरण में ‘अरुणोदय दिवस’ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. शरद बरकटकी ने की।
सभा में ‘असमिया साहित्य के इतिहास में अरुणोदय युग और माइल्स ब्रॉन्सन’ विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए रामानुजन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की उपाध्यक्षा संगीता बरुवा बोरा ने कहा कि मिशनरियों का असम आगमन एक निश्चित उद्देश्य के साथ हुआ था और असमिया भाषा के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। आत्माराम शर्मा के माध्यम से बाइबिल का असमिया अनुवाद कर असमिया भाषा की विजययात्रा का सूत्रपात किया गया।
उन्होंने कहा कि साहित्य केवल लेखन नहीं, बल्कि एक सुकुमार कला है। इतिहास के विविध पहलुओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास की बातें इंद्रधनुष के रंगों जैसी होती हैं। परंपराएँ किसी जाति को दृढ़ बनाती हैं और ‘अरुणोदय’ ने असमिया समाज को एक नए मार्ग पर अग्रसर किया। आदियुग, मध्ययुग और आधुनिक युग की चर्चा करते हुए उन्होंने मध्ययुग को असमिया जाति का स्वर्णिम काल बताया। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इन दोनों विभूतियों की चेतना को जीवित रखा जाए तो असमिया समाज को कोई कमजोर नहीं कर सकता।
संगीता बरुवा बोरा ने कहा कि ‘अरुणोदय’ ने मानव मुक्ति का गीत गाया, असमिया युवाओं को नई पहचान दी और समाज के अंतर्मन में वैज्ञानिक चेतना तथा उन्नत सोच का संचार किया। माइल्स ब्रॉन्सन द्वारा असमिया शब्दकोश के निर्माण और भाषा को वैज्ञानिक आधार देने के योगदान को स्मरण करते हुए उन्होंने भाषा-संस्कृति की रक्षा के लिए सभी से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने पत्रकारों से समाज के हित में तथ्यात्मक और संतुलित विश्लेषण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के आरंभ में जिला साहित्य सभा के सचिव राजीव कुमार हाज़रिका ने उद्देश्य व्याख्या प्रस्तुत की तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य दिलीप बोरा ने स्वागत भाषण दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शरद बरकटकी ने कहा कि ‘अरुणोदय’ असमिया नवजागरण की अग्निशिखा के समान था। उन्नीसवीं शताब्दी में जब असमिया भाषा उपेक्षा और अस्तित्व-संकट से गुजर रही थी, तब 1846 में शिवसागर से प्रकाशित ‘अरुणोदय’ पत्रिका ने भाषा और समाज को नई दिशा दी। रेवरेंड नाथन ब्राउन, ओलिवर कट्टार और विशेष रूप से माइल्स ब्रॉन्सन के योगदान को उन्होंने ऐतिहासिक बताया।
डॉ. बरकटकी ने कहा कि माइल्स ब्रॉन्सन केवल विदेशी मिशनरी नहीं, बल्कि असमिया भाषा के सच्चे साधक थे, जिन्होंने भाषा को बंगाली प्रभाव से मुक्त कर स्वतंत्र पहचान दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई। ‘अरुणोदय’ के माध्यम से तर्कवाद, नवचिंतन, शिक्षा और सामाजिक चेतना के बीज बोए गए, जिनसे आगे चलकर आधुनिक असमिया गद्य, पत्रकारिता और बौद्धिक परंपरा विकसित हुई।
कार्यक्रम में नगांव जिला साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष थगित महंत, सचिव रेवत कुमार हाज़रिका, सलाहकार घनकांत बोरा, नगांव प्रेस क्लब के अध्यक्ष जितेन बरकटकी, वरिष्ठ पत्रकार कनक हाज़रिका सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की। सभा के प्रारंभ में माइल्स ब्रॉन्सन और अमृतकंठ जुबीन गर्ग के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया। विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गीत ‘चिरस्नेही मेरी मातृभाषा’ और घोषा नृत्य ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।
अरुणोदय दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 53 पत्रकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला साहित्य सभा के पदाधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन असमिया विभाग की शिक्षिका ममी देवी शर्मा ने किया।

