साक्षीभाव

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संवेद अनु की क़लम से

महापुरुषों और नायकों की मृत्यु के बाद उनकी अच्छी और आदर्श इंसानी वाली संतुलित छवि उन्हें ज्यादा लंबे काल तक सम्मान दिलाती है।

कई वार राजनीतिक कारणों से किसी महापुरुष या नायक के चले जाने के बाद उनकी छवि को देवता, भगवान या पैगंबर जैसी छवि में ढाल दिया जाता है। ये अतिरंजित छवि,कुछ दिनों या कुछ सालों बाद उनकी आदर्श इंसानी पहचान को भी दागदार करने लगती है।किसी भी महामानव की आदर्श मानव वाली छवि को अतिशयोक्तिपूर्ण (larger than life) तरीके से गढ़ना उनके साथ न्याय नहीं अन्याय सरीखा हो जाता है।

आदर्श महापुरुष या नायक के लिए अतिशयोक्ति से गढ़ी हुई छवि उनके लिए ही बोझ बन जाती है।

ऐसा हो जाने के बाद उस व्यक्ति की इंसानी कार्यकलापों का छिद्रानवेशन होना शुरू हो जाता है।दूसरे राजनीतिक प्रतिद्वंदी उनकी सामान्य व्यक्तिगत कमजोरियों को एक खुलासे की तरह पेश करते हैं उनके जीवन काल में उनके समग्र आदर्श वाले व्यवहार जो समाज के लिए ज्यादा उपयोगी और प्रेरणादायी थे के ऊपर उनकी सामान्य इंसानी कमजोरियां बड़ी बना कर उभार दी जाती है या उभर जाती है।

ऐसे राजनीतिक श्रेणी के नायक या सामाजिक श्रेणी के नायक या कला श्रेणी के नायक या प्रेरक महापुरुषों के नाम लेकर मैं कई उदाहरण भी रख सकता हूँ। परंतु ज्यादा सही होगा कि पाठक स्वयं स्वदृष्टि से उनका अवलोकन करें उन्हें स्पष्ट समझ आ जाएगा।मेरा नाम लिखना, एक वितंडावाद का निर्माण कर देगा।एक ओर अंतहीन बहस शुरू हो जाएगी जिसमें जेरे बहस ‘ व्यक्ति ‘ हो जाएगा। व्यक्तित्व और उसका कर्तृत्व भुला दिया जाएगा।

बस दो संतुलित छवि वाले राजनेता का नाम लिखता हूँ और आप विचार कीजिए कि अगर उनकी छवि को गढ़ने का अनुष्ठानिक प्रयास नहीं हुआ तो उनके लिए जनता के मन में कितनी स्पष्ट और कालजयी श्रद्धा आज भी है ।वे नाम हैं – डॉ राजेंद्र प्रसाद और लालबहादुर शास्त्री।

…अब जिनकी छवि राजनीतिक लाभ के लिए अतिवाद के सहारे गढ़ी गई उन सबका ध्यान कीजिए।एक समय के बाद उनकी छवि कितने विवादों में घिर गई।राजनीतिक लाभ के लिए गढ़ी हुई छवि के कारण इतना भ्रम फैला कि पूरा भारतीय समाज उनके जीवन का मूल्यांकन दो विपरीत विचारों से करता है। उन महापुरुषों की छवि को लेकर देश की जनता दो धड़ों में बंट गई है।दोनों धड़े आपस में दो दुश्मन सेनाओं जैसा व्यवहार करते है।

आशा है मेरे इस ऑब्जरवेशन पर सभी सुधिमित्र ठंडे मन से विचार करेंगे और अधिक से अधिक संतुलित कमेंट भी लिखेंगे।

एक गुजारिश है कि वर्तमान में भी अगर आप-हम किसी नायक का मूल्यांकन कर रहे हैं तो_ उनको एक आदर्श मनुष्य के रूप में देखें। उनसे प्रेरणा लेकर अपना जीवन भी अर्थपूर्ण बनाएं।… न कि उन्हें ईश्वर बनाने की कोशिश करें।ऐसा करने पर अपने नायक के प्रति हम से बड़ा अपराध हो जाएगा…

लम्हे गलतियां करेंगे और सदियां सजा पाएंगी।

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