सच्चे भक्त की सहायता स्वयं करते हैं प्रभु : गौरव व्यास, गौशाला में नानी बाई रो मायरो संग भक्तमाल कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

थर्ड आई न्यूज़

गुवाहाटी, 28 मई। आठगांव स्थित श्री गौहाटी गौशाला के वृंदावन गार्डन प्रांगण में सेठ सांवरिया सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय “नानी बाई रो मायरो” संग भक्तमाल कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए मुख्य कथावाचक गौरव व्यास ने कहा कि भगवान पर अटूट विश्वास रखने वाले भक्त की सहायता स्वयं प्रभु करते हैं।

कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के जीवन से जुड़े प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब नरसी मेहता अपनी पुत्री नानी बाई के विवाह का निमंत्रण देने परिवारजनों के पास पहुंचे, तब लोगों ने यह कहकर आने से मना कर दिया कि “गरीब के मायरे में कौन जाएगा।” इसके बावजूद नरसी मेहता ने किसी से अपेक्षा नहीं रखी और 16 संतों के साथ प्रभु का स्मरण करते हुए यात्रा पर निकल पड़े।

गौरव व्यास ने कहा कि नरसी मेहता के पास धन-दौलत, आभूषण या वैभव नहीं था। उनके पास थी तो बस तुलसी की माला, तुमरी और श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति। वे बूढ़े बैलों की गाड़ी में बैठकर अपनी बेटी के ससुराल के लिए रवाना हुए। रास्ते में रात के अंधेरे में उनकी गाड़ी खराब हो गई, लेकिन तब भी उनका विश्वास नहीं डगमगाया।

महाराज ने कहा कि कथा में आगे प्रसंग आता है कि भगवान श्रीकृष्ण बढ़ई का रूप धारण कर वहां प्रकट हुए। उन्होंने गाड़ी को स्पर्श किया और वह गाड़ी मानो विमान की तरह चलने लगी। प्रभु स्वयं सारथी बनकर नरसी मेहता और संतों को भोर होने से पहले नानी बाई के ससुराल पहुंचा देते हैं। यह प्रसंग सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।

कथा के बीच-बीच में संगीतमय भजनों ने पूरे पंडाल को भक्तिरस में डुबो दिया। श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पंडाल में नरसी मेहता और 16 संतों की जीवंत झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

आयोजन समिति के सुरेंद्र लाठ ने बताया कि चौथे दिन की पूजा पंडित प्रकाश शास्त्री की देखरेख में संतोष-रेणु चौधरी, बसंत-ऊषा तांबी, रमेश-अंजू महेश्वरी, ईश्वर प्रसाद-कौशल्या चौधरी, नारायण-रतन कंवर नरुका, मुरारीलाल-शोभा चौपदार, ओमप्रकाश-अंजना लोहिया तथा पवन-सीमा बजाज द्वारा कराई गई।

पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित यह कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 6 बजे तक वृंदावन गार्डन में जारी है। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी सदस्य सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।

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