बढ़ती ताकत, बढ़ता असर: दुनिया ने भी भारत के दबदबे को माना; ब्रिक्स की ये तस्वीरें बहुत कुछ बयां कर रहीं

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली I अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर भारत का दबदबा आज एक नई ऊंचाई को छू रहा है। ब्रिक्स 2026 के भव्य आयोजन के दौरान सामने आई तस्वीरों ने पूरी दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि वैश्विक मामलों में अब भारत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्रप्रमुख भारतीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द खड़े होकर जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ चर्चा करते दिखाई दिए, वह भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का सीधा प्रमाण है।

क्या दुनिया का केंद्र बिंदु कैसे बन रहा भारत?
ब्रिक्स सम्मेलन के मुख्य सत्र और अनौपचारिक मुलाकातों से आई ये तस्वीरें सिर्फ शिष्टाचार भर नहीं हैं, बल्कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था की एक मजबूत तस्वीर हैं। चाहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खुली बातचीत हो, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में सहज संवाद हो, या अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ गर्मजोशी भरा हाथ मिलाना हो। हर तस्वीर में भारत केंद्र बिंदु में दिखाई दे रहा है।

ब्रिक्स के मंच पर कैसे दिखी भारत की ताकत?
सम्मेलन के दौरान बैठक कक्ष से लेकर मंच के गलियारों तक, हर जगह भारतीय नेतृत्व का आत्मविश्वास देखते ही बन रहा था। जब सभी राष्ट्राध्यक्ष ग्रुप फोटो और महत्वपूर्ण चर्चा के लिए एक साथ एकत्र हुए, तो सभी की निगाहें भारत के रुख पर टिकी थीं। जटिल वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी सभी पक्षों को एक मेज पर लाना और उनके साथ बेहद सहजता से चर्चा को आगे बढ़ाना केवल भारत के संतुलित दृष्टिकोण से ही संभव हो पाया है।

तस्वीरों में दिखती हंसी और गर्मजोशी के पीछे की असली ताकत क्या है?
सामने आई तस्वीरों में नेताओं के चेहरे की सहज मुस्कान और जीवंत संवाद यह बयां कर रहे हैं कि भारत का प्रभाव सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं है। वैश्विक मंदी, सप्लाई चेन और ऊर्जा संकट जैसी बड़ी चुनौतियों के दौर में विकासशील और विकसित दोनों तरह के देश भारत को एक भरोसेमंद साझीदार के रूप में देख रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया के शीर्ष नेता भारत के साथ व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंध और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए उत्सुक नजर आए।

सम्मेलन कक्ष की बैठकों से दुनिया को क्या सीधा संदेश गया?
भव्य सभागार में आयोजित मुख्य सत्र के दौरान भारत के दोनों तरफ दुनिया के दिग्गज नेता बैठे थे और पूरे सत्र का रुख भारत की प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द घूमता दिखा। यह दृश्य बताता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और सुरक्षा के नए नियम तय करने में अब भारत की आवाज सबसे प्रमुख है। दुनिया ने मान लिया है कि भारत के बिना किसी भी बहुपक्षीय मंच की सार्थकता अधूरी है।

भविष्य की विश्व व्यवस्था में भारत का स्थान अब कहां होगा?
सामने आईं ये ऐतिहासिक तस्वीरें केवल एक आयोजन की यादें नहीं हैं, बल्कि यह इक्कीसवीं सदी के नए भारत का घोषणापत्र हैं I आत्मविश्वास से भरा भारतीय नेतृत्व और दुनिया के शीर्ष नेताओं का उनके प्रति सम्मान यह सिद्ध करता है कि भारत अब किसी के पीछे चलने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक बन चुका है।

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