जिला पुस्तकालय में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के ‘डाकघर’ का प्रभावशाली मंचन,अक्की अवकाश जैन जम्मड़ ने मुख्य भूमिका में जीता दर्शकों का दिल, किस्मत बानो ने किया निर्देशन
थर्ड आई न्यूज़
गुवाहाटी । विंग्स कल्चरल ग्रुप के तत्वावधान में शनिवार को जिला पुस्तकालय, गुवाहाटी में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के कालजयी नाटक ‘डाकघर’ का सफल एवं प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रसिद्ध रंगकर्मी किस्मत बानो द्वारा निर्देशित इस प्रस्तुति ने अपनी भावनात्मक गहराई, संवेदनशील अभिनय और सशक्त संदेश के माध्यम से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
नाटक की विशेष आकर्षण रही मुख्य भूमिका में युवा अभिनेता अक्की अवकाश जैन जम्मड़ की प्रभावशाली प्रस्तुति। उन्होंने अपने किरदार को अत्यंत संवेदनशीलता, सहजता और भावनात्मक परिपक्वता के साथ निभाते हुए दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और मंच पर उनकी सशक्त उपस्थिति ने पात्र की जिज्ञासा, सपनों और बाहरी दुनिया को जानने की उत्कंठा को जीवंत कर दिया।
दर्शकों और रंगमंच प्रेमियों ने अक्की अवकाश जैन जम्मड़ के अभिनय की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण भूमिका को पूरी आत्मीयता के साथ प्रस्तुत कर युवा कलाकारों की प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय दिया है। उनके अभिनय के माध्यम से गुरुदेव टैगोर के आशा, स्वतंत्रता और जीवन की अनंत संभावनाओं से जुड़े संदेश प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचे।
नाटक में शरीफ, अनाबिया, अहिल खत्री, आशमा, पूर्वी भदानी, तिया चोपड़ा, पूजा तालुकदार, आयुष तालुकदार, किशोर दास, अफरीन अली, सैफ अली, रीमा, साजिद खत्री, चंदन अली, रूपज्योति डेका और शहनाज अली सहित सभी कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से प्रस्तुति को यादगार बना दिया।
तकनीकी पक्ष भी नाटक की सफलता में महत्वपूर्ण रहा। वेशभूषा की जिम्मेदारी शहनाज अली ने निभाई, जबकि संगीत संयोजन अरमान अली द्वारा किया गया। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था तथा बैकस्टेज संचालन में चंदन अली और साजिद खत्री सहित पूरी टीम ने उल्लेखनीय योगदान दिया।
विंग्स कल्चरल ग्रुप लंबे समय से युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने तथा साहित्य, संस्कृति और रंगमंच के प्रति नई पीढ़ी में रुचि विकसित करने का कार्य कर रहा है। ‘डाकघर’ का यह सफल मंचन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों और पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाएं आज भी मानवीय संवेदनाओं, आशा और स्वतंत्र चिंतन का प्रेरक संदेश देती हैं। ‘डाकघर’ की यह प्रस्तुति उसी शाश्वत संदेश को प्रभावशाली ढंग से मंच पर जीवंत करने में सफल रही।

