अभि-नील हत्याकांड: 20 दोषियों को आजीवन कारावास, आठ साल बाद आया बड़ा फैसला
थर्ड आई न्यूज
नगांव से जयप्रकाश सिंह
पूरे देश को झकझोर देने वाले अभि-नील हत्याकांड में लगभग आठ वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद नगांव जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 20 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। नगांव की अदालत ने बहुप्रतीक्षित इस मामले में सेशन केस संख्या 53(एन)/18 (टी-1) के तहत सुनवाई पूरी कर यह निर्णय दिया।
अदालत ने सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने से पहले वादी और बचाव पक्ष के बीच सजा को लेकर विस्तृत बहस हुई। सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता जियाउल कमार, पीड़ित परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बिजन महाजन तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मानस शरणिया ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।
गौरतलब है कि इस मामले में कुल 48 आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से 3 को नाबालिग घोषित किया गया। शेष 45 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। करीब आठ वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान 71 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 20 अप्रैल को अदालत ने 20 आरोपियों को दोषी और 25 को बरी किया था, जिसके आधार पर आज सत्र न्यायाधीश डी.जे. महंत ने सजा का ऐलान किया।
दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में विश्वराम स्वर्गीयारी, पानथेंग बसुमतारी, अलफाजस टिमुंग, इनोसिन इंगती, रायकोम टिमुंग, रत्नेश्वर टेरांग, फुकन लेखटे, आनस टिमुंग, धुनु मेच, प्रेस टिमुंग, रूपसिंह, बाबूसिंह, विक्रम हांसे, शिकारी रंपी, बाबू रंपी, विद्यासिंह रंपी, मेंसिंह, दीपज्योति बसुमतारी, वारिस रंपी और उंदा मेच शामिल हैं।
फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता जियाउल कमार ने कहा कि वे इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और इस संबंध में राज्य सरकार के लीगल सेल को पत्र भेजा जाएगा। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता मानस शरणिया ने कहा कि इस मामले में धारा 302 (हत्या) के बजाय धारा 304 (भाग-2) लागू होनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और आरोपियों की जमानत के लिए भी आवेदन किया जाएगा।क्या
पीड़ित नीलोत्पल दास के पिता गोपाल चंद्र दास और जी नाथ के पिता अजित नाथ ने भी फैसले पर आंशिक असंतोष जताया। उनका कहना है नमस्ते उन्हें साजिशकर्ताओं और उकसाने वालों को कड़ी सजा मिलने की उम्मीद थी।
वहीं अभि-नील के मित्र अंकुर सैकिया ने कहा कि उनकी भावनाएं मिश्रित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों से वे पीड़ित परिवार के साथ अदालत आते-जाते रहे और अब इस फैसले के बाद उन्हें कुछ राहत मिली है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और आगे कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

