नगांव उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका पर टिकी नजरें, भाजपा के लिए 2024 के प्रदर्शन में सुधार की चुनौती

थर्ड आई न्यूज

नगांव से जयप्रकाश सिंह

नगांव लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। 6 अक्टूबर को होने वाले इस उपचुनाव में भाजपा के देवाशीष शर्मा, कांग्रेस की शिवामोनी बोरा और एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल प्रमुख उम्मीदवारों के रूप में मैदान में हैं। नामांकन के अंतिम दिन 25 उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किए थे, जिनमें जांच के बाद 18 नामांकन वैध पाए गए। बाद में तृणमूल कांग्रेस के अब्दुल सलाम ने चुनाव मैदान से हटने की घोषणा कर दी।

नगांव उपचुनाव के राजनीतिक समीकरण में क्षेत्र की सामाजिक और भौगोलिक संरचना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से लाहोरीघाट, धिंग, रूपहीहाट और सामागुड़ी जैसे विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी है। दूसरी ओर नगांव-बटद्रवा, राहा, जगीरोड और मोरीगांव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले का स्वरूप अलग रहा है। ऐसे में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग दलों की चुनावी पकड़ और मतों का बंटवारा उपचुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक हो सकता है।

2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े :
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई को 7,88,850 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के सुरेश बोरा को 5,76,619 और एआईयूडीएफ के अमीनुल इस्लाम को 1,37,340 वोट मिले थे। इस चुनाव में बोरदोलोई ने भाजपा उम्मीदवार को 2,12,231 मतों से पराजित किया था।

विधानसभा क्षेत्रवार परिणामों में भी नगांव लोकसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में मतदाताओं के रुझान में काफी अंतर दिखाई दिया था। जगीरोड और मोरीगांव में भाजपा को कांग्रेस की तुलना में स्पष्ट बढ़त मिली थी, जबकि लाहोरीघाट जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस को बड़ी बढ़त हासिल हुई थी। 2024 में लाहोरीघाट में कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई को 1,72,340 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के सुरेश बोरा को 40,803 वोट मिले। जागीरोड में भाजपा को 1,34,665 और कांग्रेस को 57,865 वोट मिले थे।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि नगांव संसदीय क्षेत्र में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी व्यवहार एक जैसा नहीं रहा है। यही कारण है कि उपचुनाव में प्रत्येक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र का प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा।

मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका :
नगांव संसदीय क्षेत्र के मुस्लिम बहुल या मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी वाले क्षेत्रों में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच मतों के बंटवारे का सवाल इस चुनाव में विशेष महत्व रखता है। 2024 में एआईयूडीएफ को पूरे लोकसभा क्षेत्र में 1,37,340 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 7,88,850 वोट मिले थे।

इस बार बदरुद्दीन अजमल के स्वयं चुनाव मैदान में उतरने से मुस्लिम मतों के समीकरण पर विशेष नजर है। हालांकि इन मतदाताओं का अंतिम रुझान क्या होगा, यह चुनाव प्रचार, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और मतदान के दिन मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा। किसी एक समुदाय के मतदाताओं के बारे में एकतरफा निष्कर्ष निकालने के बजाय विधानसभा क्षेत्रवार मतदान और पिछले चुनावों के आंकड़ों को साथ रखकर स्थिति को देखना अधिक उचित होगा।

भाजपा के सामने 2024 के आंकड़ों से आगे निकलने की चुनौती :
2024 में भाजपा को नगांव लोकसभा क्षेत्र में 5.76 लाख से अधिक वोट मिले थे। इस बार पार्टी ने देवाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है और संगठन ने उन विधानसभा क्षेत्रों में भी प्रचार तेज किया है, जहां पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा अपेक्षाकृत कमजोर रही थी। भाजपा के लिए अपने पिछले प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि करना चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वहीं कांग्रेस के सामने 2024 में मिली बढ़त को बनाए रखने की चुनौती है। पार्टी ने सिबामोनी बोरा को उम्मीदवार बनाया है। एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल की मौजूदगी से विपक्षी मतों के संभावित बंटवारे का मुद्दा भी चुनावी चर्चा के केंद्र में है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों के प्रदर्शन का असर विधानसभा क्षेत्रवार परिणामों में दिखाई दे सकता है।

उपचुनाव की तस्वीर में एक और बदलाव तृणमूल कांग्रेस के चुनाव से हटने के कारण आया है। पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल सलाम ने नामांकन दाखिल करने के बाद चुनाव से हटने की घोषणा की। इससे मैदान में मौजूद उम्मीदवारों के बीच संभावित मतों के बंटवारे का समीकरण भी बदला है।

कुल मिलाकर नगांव लोकसभा उपचुनाव में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मतदान का रुझान, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच मतों का बंटवारा, भाजपा का 2024 की तुलना में प्रदर्शन तथा आठ विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों की पकड़ प्रमुख चुनावी कारक बने हुए हैं। हालांकि किस दल को कितना समर्थन मिलेगा और कौन उम्मीदवार विजयी होगा, इसका निर्धारण अंततः 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान और 9 अक्टूबर को होने वाली मतगणना से ही होगा।

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